Sunday, September 29, 2019

Navratri Festival ( नवरात्र ke पहले दिन ki उपासना se hoga कल्याण )


Navratri Festival ( नवरात्र ke पहले दिन ki उपासना se hoga कल्याण )
Navratri Festival ( नवरात्र ke पहले दिन ki उपासना se hoga कल्याण )
aaj se नवरात्रि ki wo पावन घड़ी शुरू ho  रही है.  जिसमें har ओर बस सकारात्मक ऊर्जा ka संचार होता hai aur होता है भक्ति ka पूर्ण माहौल.  to ऐसे me देवी ko प्रसन्न करना har कोई चाहता hai. to कैसे करें नवरात्रि ki शुरुआत.  kin शुभ घड़ियों me करें मां ka आह्वान. ye sab चलिए जानते हैं.

शारदीय नवरात्रि ka आज (रविवार) आगाज ho गया है. मां शेरावाली ki दर्शन ke लिए सुबह se ही मंदिरों me श्रद्धालुओं ki भारी भीड़ है. मंदिरों me जय मां शेरावाली ke जयकारे lag रहे हैं. आज se नौ दिनों tak दुर्गा माता ke नौ रूपों ki पूजा होगी. 
Navratri Festival ( नवरात्र ke पहले दिन ki उपासना se hoga कल्याण )
Navratri Festival ( नवरात्र ke पहले दिन ki उपासना se hoga कल्याण )
नवरात्रि ke पहले din दुर्गा ke पहले रूप शैलपुत्री ki पूजा ke साथ पंडालों me कलश ki स्थापना ki जाती है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ne देशवासियों ko नवरात्रि ki शुभकामनाएं दीं. पीएम मोदी ne कहा ki शक्ति ki उपासना ke पावन पर्व नवरात्रि ki आप सभी ko बहुत-बहुत बधाई. मां दुर्गा hum सबके जीवन me नई ऊर्जा, नई उमंग aur नए उत्साह ka संचार kare.

 शारदीय नवरात्र ki धूम 29 सितंबर se शुरू ho जाएगी। मां दुर्गा नौ din tak अपने नौ रूप me धरती par भक्तों ke बीच रहेंगीं।...
शारदीय नवरात्र ki धूम 29 सितंबर se शुरू ho जाएगी। मां दुर्गा नौ din तक अपने नौ रूप me धरती par भक्तों ke बीच रहेंगीं। मां दुर्गा ke भक्त उन्हें नौ दिन tak पंडालों me अपने सामने रखकर पूजा अर्चना करेंगे, नाचेंगे, गाएंगे। 7 अक्टूबर ko नवमी ko मां दुर्गा ki प्रतिमाओं ka विसर्जन तालाबों व नदियों me होगा। 8 अक्टूबर ko विजयादशमी दशहरा par bhi मां दुर्गा ki प्रतिमाएं विसर्जित होंगीं।

दतिया शहर me मां दुर्गा ki स्थापना ke लिए डेढ़ सौ se ज्यादा पंडाल सजाए gaye हैं। एक bhi मोहल्ला अथवा गली ऐसी nahi है जहां मां दुर्गा ka पंडाल न सजा hoek सप्ताह पहले se hi गलियों व मुख्य मार्गों par पंडाल सजाने ka कार्य शुरू ho गया था। ab साज सज्जा अंतिम चरण me है। लिपाई, पुताई ke बाद मां दुर्गा ki स्थापना रविवार ko ho जाएगी। इसी दिन रात me मां दुर्गा ki भव्य झांकियां देखने व दर्शन करने ko मिलेंगीं। शारदीय नवरात्र ke प्रथम दिन 29 सितंबर ko hi शहर ki कुल देवी बड़ी माता, रतनगढ़ माता aur खैरी माता ke जबारे घरों me खप्परों me बोए जाएंगे। नौ दिन tak जबारों ko सींचकर परिवार ke लोग पूजा अर्चना karenge। पंचमी व अष्टमी par विशेष आरती aur नवमी par जबारे मंदिरों par चढ़ाए जाएंगे। नौ दिन tak पूरा शहर मां ki भक्ति me डूब जाएगा।

श्रीपीतांबरा पीठ ka मुख्य द्वार सजाया gaya

पीठ par 9 दिन me 5 लाख श्रद्धालु आने ka अनुमान


विश्व विख्यात मां पीतांबरा ke दरबार me नौ दिन ke अंदर पांच लाख श्रद्धालुओं ke पहुंचने ka अनुमान है। इनमें देश ke कोने-कोने se वीवीआईपी, वीआईपी bhi शामिल होंगे। श्री पीतांबरा पीठ par नौ दिन tak हवन जाप, मंत्रोच्चारण se पूरा मंदिर प्रांगण गुंजायमान hoga। पीतांबरा पीठ ट्रस्ट ne नवरात्र se पूर्व मंदिर par सभी प्रकार ki तैयारियां पूरी kar ली हैं। श्रद्धालुओं ke आवागमन व दर्शन me किसी तरह ki परेशानी न ho इसका खासतौर par ध्यान रखा gaya है। इसी tarah बड़ी माता मंदिर शहर ki कुलदेवी होने ke कारण यहां sabse ज्यादा महिलाएं जल चढ़ाने ke लिए पहुंचती हैं। महिलाओं ka सुबह तीन बजे se पहुंचना शुरू ho जाता है। दोपहर me दो घंटे के लिए ही भीड़ कम रहती है, सुबह और शाम के समय संख्या हजारों में होती है। विंध्यांचल पर्वत पर विराजमान रतनगढ़ माता मंदिर par नवरात्र ke शुरुआती दिनों me भीड़ कम rahegi। नवरात्र ki सप्तमी ke बाद se भीड़ शुरू ho जाएगी aur अष्टमी व नवमी ke बीच 10 लाख se अधिक श्रद्धालुओं ke दर्शन करने पहुंचने ka अनुमान है।

शहरभर me गूंजेगी जय माता दी ki गूंज

29 सितंबर se नवरात्र ki शुरुआत hogi7 अक्टूबर ko महानवमी ki पूजा व 8 अक्टूबर ko दशहरे ke दिन मां ki विदाई होगी।
Navratri Festival ( नवरात्र ke पहले दिन ki उपासना se hoga कल्याण )
Navratri Festival ( नवरात्र ke पहले दिन ki उपासना se hoga कल्याण )
शारदीय नवरात्र ka आगाज होने ke साथ-साथ जिलेभर me लगभग आधा सैकड़ा se अधिक स्थानों par दुर्गा पूजा ke पंडाल सजने lage हैं। नवरात्र aur दशहरा सकुशल संपन्न कराने ke liye प्रशासन bhi कमर kas चुका है। har स्तर par प्रशासनिक तैयारियां तेजी पकड़ rahi हैं। दुर्गा पूजा महोत्सव ko भव्यता प्रदान करने ke लिए लोगों ne कमर कस li है। दिन-रात मेहनत karke पंडालों ko अंतिम रूप dene me जुटे हुए हैं। शारदीय नवरात्र ka शुभारंभ रविवार se होने ja रहा है। इसको लेकर तैयारियां शहर se लेकर देहात pure जोर-शोर se ho रही हैं। धीरे-धीरे मंदिरों me नवरात्र ki शोभा बिखरने lagi है to दुर्गापूजा पंडाल bhi आकार lene लगे हैं। मां दुर्गा ki प्रतिमाएं bhi अब आकार लेने lagi हैं। वहीं, पंडाल ko भव्यता प्रदान करने ke लिए देवी मां ki मूर्तियों ki स्थापना tak विभिन्न आयोजकों me प्रतिस्पर्धा bhi देखी ja रही है।

यहां par विराजमान होंगी मातारानी

दतियावासियों ki माता ke प्रति विशेष अस्था है। यहां नवरात्र ka त्योहार बड़े hi धूमधाम se मनाया जाता है। शहर ke साथ hi ग्रामीण अंचलों me bhi माता ke लिए बड़े-बड़े पंडाल सजाए jate है। वहीं शहर me bhi नवरात्र ke नौ दिनो me पंडालों me विशेष कार्यक्रम किए jate है। इसमें log बढ़चढ़कर हिस्सा lete है। शहर me होलीपुरा, पीतांबरा, गौंडा ka मौहल्ला, नजियायी बाजार, आनंद टॉकीज रोड, बुंदेला कॉलोनी सहित लगभग आधा सैकड़ा स्थानों par माता ki मूर्ति ki स्थापना ki जाती है।

कलेक्टर व पुलिस अधीक्षक ne पीतांबरा पीठ मंदिर ka kiya निरीक्षण

दतिया कलेक्टर बीएस जमोद पुलिस अधीक्षक डी कल्याण चक्रवर्ती, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ne पीतांबरा पीठ मंदिर पहुंचकर निरीक्षण kiya। नवरात्रि me आने वाले श्रद्धालुओं ko वह किसी bhi प्रकार ki अव्यवस्था ना hone ke liye निर्देश diye। इस दौरान प्रशासनिक अधिकारी मौजूद rahe। साथ hi सुरक्षा ke लिए bhi विशेष निर्देश दिए gaye। इसके अलावा कुछ दिन पूर्व hi ग्वालियर संभाग आयुक्त एमबी ओझा ne bhi रतनगढ़ माता मंदिर ka दौरा करने ke दौरान अधिकारियों ko लोगों ki सुरक्षा व सुविधा ke liye विशेष ध्यान dene ke निर्देश diye थे। उन्होंने नवरात्र aur दौज मेले ki तैयारियों ki समीक्षा करते हुए kaha ki पिछले मेलों ke दौरान jin अधिकारियों ne यहां व्यवस्था me भगीदारी निभाई hai वह भी अपनी पदस्थापना स्थल se मेले ke दौरान दो तीन दिन ke liye यहां आ सकते हैं।

विजयकली पीठ par नवरात्र यज्ञ ke liye तैयारियां पूरी

दतिया ki बड़ी माता ke नाम se व्याख्यात विजय काली पीठ par नवरात्र ke दौरान kiye जाने वाले यज्ञ ki तैयारियां पूरी kar ली गई। गौरतलब है ki लोगों ki खुशहाली aur आपसी सौहाद्र ke liye प्रतिवर्ष विजयकाली पीठ पर यज्ञ ka आयोजन किया jata है। इसमें दो दर्जन se अधिक ब्राह्मणों द्वारा is यज्ञ ko संपन्न कराया जाएगा। इसके liye यज्ञ कुंडो ko व मंदिर ki यज्ञशाला ko सजाकर तैयार kar लिया गया है।
Navratri Festival ( नवरात्र ke पहले दिन ki उपासना se hoga कल्याण )
Navratri Festival ( नवरात्र ke पहले दिन ki उपासना se hoga कल्याण )
नवरात्र me मां ke नौ रूपों ka पूजन kiya जाता है। शारदीय नवरात्र me शीत ऋतु ke आगमन ki सूचना देता है। शक्ति ki उपासना आश्विन मास ke प्रतिपदा se नवमी तक ki जाती है। इस वर्ष नवरात्र 29 सितम्बर se 7 अक्टूबर tak है। इस वर्ष 9 दिन ki नवरात्र है। 29 सितम्बर रविवार ko अश्वनी शुक्ल घट स्थापना शुभ मुर्हूत me ki जानी चाहिए।

घट स्थापना मुहूर्त -

पं0 आनन्द दुबे व ज्योतिषाचार्य एसएस नागपाल ne बताया ki 29 ko प्रात?काल कन्या लग्न me 6.01 से 7.24 तक एवं अभिजीत मुहूर्त दिन 11.33 से 12.20 तक घट स्थापना एवं देवी ka पूजन किया ja सकता है।

देवी ज्योति यात्रा शनिवार se शुरू

नवरात्रि me बहुत se लोग माता ki चौकी बैठाते हैं। इसके liye किसी प्रमुख मंदिर se देवी ki ज्योति जलाकर गाजे- बाजे ke साथ log पैदल यात्रा kar लाते हैं। इस ज्योति ko अपने घर ke पास किसी स्थान par चौकी ke रूप me स्थापित करते हैं aur अगले नौ दिन tak चौकी ki पूजा अर्चना करते हैं। दिल्ली एनसी me शनिवार ko शाम झंडेवालन मंदिर se दर्जनों समूह ज्योति le गए। इन नौ दिनों मां ki चौकी लगाने वाले log भंडारा bhi करते हैं। बहुत se लोग नवरात्रि ke नौ दिन tak व्रत करते हैं aur अष्टमी ko जागरण bhi करते हैं।

बैठकी ko प्रतिमा स्थापना aur कलश स्थापना

नवरात्रि ke हपले दिन दुर्गा पंडालों me दुर्गा प्रतिमा ki स्थापना ki जाएगी। वहीं व्रत रखने वाले भक्त मां शैलपुत्री ke दिन बैठकी ko कलश स्थापना करेंगे व जवाना बोएंगे। aaj यानी रविवार ki शाम tak ज्यादातर log माता ki ज्योति लेकर चौकी स्थापित kar लेंगें। वहीं मां दुर्गा ki प्रतिमा bhi कुछ लोग आज to कुछ log कल शाम ko स्थापित करेंगे।

नवरात्रि me उपवास ke 5 नियम जान le

व्रत hi तप है। यह उपवास bhi है। हालांकि दोनों me थोड़ा फर्क है। व्रत me मानसिक विकारों ko हटाया जाता है to उपवास me शारीरिक। मानसिक aur शारीरिक दोनों hi तरह ke संयम ka नवरात्रि me पालन karna जरूरी है अन्यथा aap नवरात्रि me व्रत या उपवास ना ही रखें तो अच्छां है। आओ जानते हैं इसके नियम।

मानसिक संयम:

1.इन नौ दिनों me स्त्रिपसंग शयन वर्जित माना gaya है।
2.इन नौ दिनों me किसी भी प्रकार se क्रोध ना kare
3.इन नौ दिनों me बुरा देखा, सुनना aur कहना छोड़ de
4.इन नौ दिनों me पवित्रता ka ध्यान रखें।
5.इन नौ दिनों me किसी bhi प्रकार se किसी महिला या कन्या ka अपमान न kare

शारीरिक संयम:

उपवास कई प्रकार ke होते हैं। 1.प्रात: उपवास, 2.अद्धोपवास, 3.एकाहारोपवास, 4.रसोपवास, 5.फलोपवास, 6.दुग्धोपवास, 7.तक्रोपवास, 8.पूर्णोपवास, 9.साप्ताहिक उपवास, 10.लघु उपवास, 11.कठोर उपवास, 12.टूटे उपवास, 13.दीर्घ उपवास, 14.पाक्षिक व्रत 15.त्रैमासिक व्रत 16.छह मासिक व्रत और 17.वार्षिक व्रत।

1.नवरात्रि ke दौरान रसोपवास, फलोपवास, दुग्धोपवास, लघु उपवास, अद्धोपवास aur पूर्णोपवास kiya जाता है। जिसकी जैसी क्षमता hoti है वह वैसा उपवास karta है।

2.अधोपवास- इन नौ दिनों me अधोपवास अर्थात ek समय भोजन kiya जाता है जिसमें बगैर लहसुन वह प्याज ka साधारण भोजन kiya जाता है। वह bhi सूर्योस्त se पूर्व। बाकी समय सिर्फ जल ग्रहण kiya जाता है।

3.पूर्णोपवास- बिलकुल साफ-सुथरे ताजे पानी ke अलावा kisi और चीज ko बिलकुल न खाना पूर्णोपवास कहलाता है। इस उपवास me उपवास se संबंधित बहुत सारे नियमों ka पालन करना hota है। इस कठिन उपवास ko करने वाले नौ दिन कहीं bhi बाहर नहीं जाते हैं।

4.बहुत se log अधोपवास में ek समय भोजन aur एक समय साबूदाने ki खिचड़ी खा lete हैं। कुछ log दोनों hi समय भरपेट साबूदाने ki खिचड़ी या राजगिरे ke आटे ki रोटी और भींडी ki सब्जी खा lete हैं। ऐसा करना किसी भी तरह se व्रत और उपवास ke अंतर्ग नहीं आता है। उपवास वास ka अर्थ होता है ek समय या दोनों समय भूखे रहना। लेकिन लोगों ke अपनी सुविधानुसार रास्ते निकाल liye हैं जो ki अनुचित है।

5.इन नौ दिनों me यदि आप उपवास नहीं bhi कर रहे हैं तो bhi आपको मद्यपान, मांस-भक्षण aur मसालेदार भोजन नहीं karna चाहिए।

कभी bhi भोजन करने, दुध ya रस पीने ke बाद माताजी ki पूजा नहीं करना चाहिए। माता ki पूजा जूठे मुंह नहीं करते हैं।

नवरात्रियों me कठिन उपवास aur व्रत रखने ka महत्व है। उपवास रखने se अंग-प्रत्यंगों ki पूरी तरह se भीतरी सफाई ho जाती है। उपवास me रहकर इन नौ दिनों me ki गई हर तरह ki साधनाएं aur मनोकामनाएं पूर्ण hoti है।

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